Saturday, August 28, 2010

Khwaboo ko haqeeqat kar dena....

बारिश की इन बरसती हुई बूंदों की तरह
जाना !! इस दिल की प्यास बुझा देना
सावन में महकती फिजाओ कि तरह
जरा मेरा यह जीवन भी तो महका देना !!

अपने हुस्न की कुछ जादूगिरी दिखलाना
तमाम उम्र के लिए हमे अपना बना लेना
ना हो सिकन, हो बस प्यार ही प्यार जहा
मेरे संग ऐसी ख्वाबो कि बस्ती बसा लेना !!

मिले जो फुर्सत तुझे इस महफिले शहर से
तो जरा हमपर भी थोडा करम फरमा लेना
है येही इल्तजा तुझसे, हमे अपनी सांसो
धडकनों, चाहतो, खवाबो में बसा लेना !!

निकालो जब भी तुम इन रास्तो पर जरा
इस ओर भी अपनी ये नज़रे घुमा लेना..
हो जाये हम घायल देख तुम्हे पल भर में
अपनी नजरो को इतना भी न कातिल बना लेना !!

मिले जब भी नज़रे तेरी मेरी कभी रास्तों में
मेरी जान एक अदा से इन्हें तू झुका लेना..
है बड़ी खुबसूरत यह झील सी आँखें तेरी
सुन जरा ! इनमे सुरमा तू लगा लेना !!

देख कैसे उड़ रही है हवा में यह जुल्फे तेरी
जरा अपनी लहराती जुल्फे तो संवार लेना
कही लग जाये ना नज़र तुझे आशिकों की
जानेजां जरा मुखडे पे घूँघट तू चढा लेना !!

करे जब भी दिल तेरा मुझे देखने को बस
नज़रे घुमा कर जरा घूँघट उठा लेना ...
पढ़ लेंगे हम तेरे दिल का हर एक ख्याल
बस हमे देख तू होटों को हिला लेना !!

और क्या कहे, और क्या लिखे हम..बस
देख के हमे तू दिल की हालत समझ लेना
अब और यु तनहा जिया नहीं जाता ओमी
उनसे कहो आकार इन खवाबो को हकीकत कर दे ना !! 


मेरी अपनी कलम से

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